
हम चिरागों को जलाएं उम्र भर,
साथ दे गर ये हवाएं उम्र भर।
एक लम्हे की खता का यह सिला,
पाई है हमने, ये सजायें उम्र भर।
कुछ भी तो न हासिल हमको हो सका,
उसके दर पर दी सदायें उम्र भर।
याद आयेंगी बहुत, सच मानिये हमको, हमारी खताएं उम्र भर।
पल दो पल का साथ देते है सभी,
कौन करता है वफायें उम्र भर।
भूल जाऊंगा, मगर एक शर्त है,
आप भी न याद आयें उम्र भर।
साथ दे गर ये हवाएं उम्र भर।
एक लम्हे की खता का यह सिला,
पाई है हमने, ये सजायें उम्र भर।
कुछ भी तो न हासिल हमको हो सका,
उसके दर पर दी सदायें उम्र भर।
याद आयेंगी बहुत, सच मानिये हमको, हमारी खताएं उम्र भर।
पल दो पल का साथ देते है सभी,
कौन करता है वफायें उम्र भर।
भूल जाऊंगा, मगर एक शर्त है,
आप भी न याद आयें उम्र भर।

बहुत खूब....
ReplyDeleteहिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
ReplyDeleteकृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें
बहुत सुंदर...बहुत खूब
ReplyDeleteकुछ भी तो न हासिल हमको हो सका,
या
कुछ भी न हासिल हमको हो सका
बात एक ही है तो फिर ..तो.. लगाने की क्या जरूरत
आशा है आपकी लेखन यात्रा आगे भी जारी रहेगी...शुभ कामनाएं
http://veenakesur.blogspot.com/
भूल जाऊंगा, मगर एक शर्त है,
ReplyDeleteआप भी न याद आयें उम्र भर।
@ भूल जाऊँगा, डगर आपके ब्लॉग की
आप भी अगर ना आए मेरे ब्लॉग पर.
rahul ji..so beautiful
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